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बिहार में गॉल ब्लैडर स्टोन से जुड़े भ्रम: विस्तार से तथ्य, और गलती से होने वाले नुकसान

  • लेखक की तस्वीर: Kumar Rishank
    Kumar Rishank
  • 9 अक्टू॰ 2025
  • 2 मिनट पठन

बिहार, पटना और बिहार शरीफ के मरीजों में पित्त की थैली की पथरी (गॉल ब्लैडर स्टोन) को लेकर कई गलत धारणाएँ हैं। यहाँ हर भ्रम के बाद विस्तार से सच्चाई और अगर मरीज इस भ्रम को मानते हैं, तो क्या समस्या हो सकती है, बताया गया है:

मिथक

विस्तार से सच्चाई

भ्रम मानने पर समस्या

मसाले या तला-भुना खाना ही पथरी का कारण है

मसालेदार या तली चीजों का ज्यादा सेवन अकेले पथरी का मुख्य कारण नहीं है। असली जोखिम फैमिली हिस्ट्री, मोटापा, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल असंतुलन, तेजी से वजन घटाना और कुछ संक्रमण हैं।

मरीज जरूरी जांच या सलाह न लेकर केवल खानपान सीमित कर देते हैं, सही जोखिम नहीं समझते जिससे असली खतरा बढ़ जाता है।

हर पथरी में दर्द होता है

पित्त की थैली में बहुत बार "साइलेंट" पथरी होती है, जो कोई लक्षण नहीं देती। यह तभी दर्द/बुखार देती है, जब मार्ग बंद हो या संक्रमण हो। अल्ट्रासाउंड से पता चल सकता है।

मरीज समस्या को नजरअंदाज करते हैं, और अचानक तेज़ दर्द, बुखार, जॉन्डिस या गंभीर संक्रमण (पेरिटोनाइटिस) का शिकार हो सकते हैं—तब आपातकालीन सर्जरी जरूरी हो जाती है।

आयुर्वेद/होम्योपैथी से पत्थर निकल सकता है

किसी विज्ञान-सम्मत दवा या तरीका से बड़ी/पुरानी पथरी निकलना संभव नहीं है। सिर्फ सर्जरी ही ज्यादा पथरी का इलाज है। कभी-कभी आयुर्वेदिक या घरेलू तरीका लक्षण में राहत दे सकता है, लेकिन पत्थर नहीं घुलता।

मरीज सर्जरी टालते हैं और पथरी बढ़ जाती है, संक्रमण, पित्त थैली फटना, या पेन्क्रियाटाइटिस जैसी गंभीर स्थिति हो सकती है।

दवा से हर पथरी घुल जाएगी

कुछ बहुत छोटी, सिर्फ कोलेस्ट्रॉल वाली पथरी में दवा असर कर सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों (विशेषकर बिहार में) दवा से कोई फर्क नहीं पड़ता, और पित्त की थैली निकालना ही इलाज है।

मरीज बार-बार दवा लेते रहते हैं, संक्रमण या ब्लॉकेज की गंभीर स्थिति का सामना कर सकते हैं, जिससे अचानक इमरजेंसी ऑपरेशन करना पड़ता है।

ज्यादा तेल-घी खाने से पथरी नहीं बनेगी

ज्यादा तेल-घी लेना पित्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है—और पथरी की संभावना ज्यादा हो जाती है। संतुलित आहार, सीमित फैट का सेवन ही सही है।

अगर मरीज ज्यादा तेल-घी खाना जारी रखते हैं तो पथरी या अन्य बीमारियाँ (फैटी लिवर, हृदय रोग) का खतरा बढ़ता है।

ओपन सर्जरी ही सही है

लैप्रोस्कोपिक (कीहोल) सर्जरी संसार भर में सबसे सुरक्षित, तेज, कम दर्द वाली है—ओपन सर्जरी सिर्फ विशेष मुश्किल मामलों में होती है।

बिना जरूरत के ओपन सर्जरी कराने से ज्यादा दर्द, बड़ा घाव, लंबा भर्ती समय, संक्रमण खतरा बढ़ सकता है।

गॉल ब्लैडर निकलवाने के बाद कमजोरी, भोजन पर बड़ा असर

गॉल ब्लैडर के बिना 90% से ज्यादा मरीज बिल्कुल सामान्य जीवन जीते हैं—ना कमजोरी, ना बड़े खाने-पीने का फर्क; कभी-कभी थोड़ा फैट कम करना पड़ता है।

मरीज अनावश्यक डर के कारण सर्जरी टालते हैं और लंबी तकलीफ सहते हैं। खाने में बेवजह कटौती से पोषण की कमी हो सकती है।

मरीजों के लिए खतरे और सुझाव

  • "साइलेंट" पथरी को नजरअंदाज करना जोखिमभरा है—अचानक गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

  • आयुर्वेद/घरेलू उपाय के कारण सही इलाज में देरी, जिससे जटिलता बढ़ सकती है।

  • ओपन सर्जरी के लिए डर से फिनिशिंग सर्जरी टालना, अधिक रिकवरी समय व पीड़ा।

  • खाने-पीने को लेकर अनावश्यक चिंता पोषण की कमी बना सकती है।

अशिर्वाद हेल्थकेयर क्यों?

  • पटना/बिहार शरीफ में एडवांस्ड अल्ट्रासाउंड, लेजर/लैप्रोस्कोपिक सर्जरी

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